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Wednesday, 20 March 2019

Apj Abdul Kalam Biography in Hindi | एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय

Apj abdul kalam- डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक और भारत के 11वें राष्ट्रपति थे | उन्होंने देश के कुछ महत्वपूर्ण संगठनों ( डीआरडीओ और इसरो ) मे कार्य किया | उन्होंने वर्ष 1998 पोखरण द्वितीय परमाणु परीक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | डॉक्टर अब्दुल कलाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल विकास कार्य के साथ भी जुड़े थे इसलिए इन्हें मिसाइल मैन भी कहा जाता है कहा जाता है |  वर्ष 2002 में कलाम भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुने गए और 5 वर्ष की अवधि के बाद वह शिक्षण, लेखन और सार्वजनिक सेवा में लौट आए | उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रतन सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया !

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Apj Abdul Kalam Biography in Hindi

APJ Abdul Kalam Biography in Hindi | एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय


‌ डॉ कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलआबदीन अब्दुल कलाम है | एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मुस्लिम परिवार में हुआ | अब्दुल कलाम के पिता का नाम जैनुलआबदीन था जो एक नाविक थे थे उनकी माता का नाम आशिमा था जो एक ग्रहणी थी | कलाम के पिता ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और वह मछुआरों को नाव किराए पर दिया करते थे | पांच भाई बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाया करते थे | इसलिए शुरूआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम करना पड़ा 8 साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4:00 बजे उठते थे  और नहाकर गणित की पढ़ाई करने के लिए चले जाते थे  सुबह  नहा कर जाने के पीछे का कारण यह था कि प्रत्येक साल 5 बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर  बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे | ट्यूशन से आने के बाद वो नमाज पढ़ते और इसके बाद सुबह 8:00 बजे रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज़ पेपर बांटते थे | अपने स्कूल के दिनों में कलाम पढ़ाई लिखाई में सामान्य थे पर नई चीजें सीखने के लिए हमेशा तत्पर और तैयार रहते थे |  उनमें सीखने की भूख थी और वह अपनी पढ़ाई पर घंटों ध्यान देते थे | अब्दुल कलाम जी ने अपनी शुरुआती शिक्षा रामेश्वरम एलिमेंट्री स्कूल से की और उसके बाद तिरुचिरापल्ली के सैंट जोसेफ कॉलेज में दाखिला लिया जहां से उन्होंने वर्ष 1954 में  भौतिक विज्ञान में स्नातक किया ‌| उसकेे बाद वर्ष 1955 में वो मद्रास चले गए जहां से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की | वर्ष 1960 में अब्दुुुल कलाम जी ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की ! कलाम जी एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आने के पीछे अपने अपने पांचवी क्लास के टीचर सुब्रमण्यम अय्यर को बताते हैं कलाम जी कहते हैं कि वह हमारे सबसे अच्छे टीचर थे | एक बार उन्होंने क्लास में पूछा था कि चिड़िया कैसे उड़ती है | क्लास के किसी भी बच्चे ने इसका उत्तर नहीं दिया तो वह अगले दिन सभी बच्चों को समंदर के किनारे ले गए | वहां कई सारे पक्षी उड़ रहे थे तो कुछ उतर रहे थे और कुछ समुद्र के किनारे बैठे थे | वहां उन्होंने हमें पक्षी के उड़ने के पीछे के   कारण को समझाया और साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को विस्तारपूर्वक बताया जो उड़ने में सहायक होता है | अब्दुल कलाम जी कहते हैं कि उनके द्वारा समझाए गई बातें मेरे अंदर ऐसे समा गई कि मुझे हमेशा महसूस होने लगा कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर हूं | उस दिन की घटना ने मुझे जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी | बाद में मैंने तय किया कि उड़ान की दिशा में ही अपना करियर कैरियर बनाऊंगा ! 

Apj Abdul Kalam Career | एपीजे अब्दुल कलाम का करियर

मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी करने के बाद कलाम जी ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिक के तौर पर भर्ती हो गए | कलाम जी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना के लिए एक छोटे हेलीकॉप्टर का डिजाइन बनाकर की | डीआरडीओ में कलाम जी को उनके काम से संतुष्टि नहीं मिल रही थी | अब्दुल कलाम जी पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा गठित इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च के सदस्य भी थे | इस दौरान उन्हें प्रसिद्ध अंतरिक्ष  वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ कार्य करने का अवसर मिला | वर्ष 1969 में उनका स्थानांतरण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हुआ | कलाम जी ISRO में भारत के पहले SLV-3 (Rohini) के समय प्रोजेक्ट हेड बने | इसी परियोजना की सफलता के परिणामस्वरूप भारत का प्रथम उपग्रह रोहिणी पृथ्वी की कक्षा में वर्ष 1980 में स्थापित किया गया | इसरो मेंं शामिल होना कलाम जी के करियर का सबसे अहम मोड़ था | और जब उन्होंने SLV-3 परियोजना पर कार्य करना आरंभ किया तब उन्हें लगा कि वह वही कार्य कर रहे हैं जिसमें उनका मन लगता है | 1963-64 के दौरान उन्होंनेे अमेरिका के अंतरिक्ष संगठन नासा की भी यात्रा  की | परमाणु वैज्ञानिक राजा रामन्ना जिनकी देखरेख में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया | कलाम जी को वर्ष 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण देखनेे के लिए बुलाया था | 70 और 80 के दशक में कलाम जी अपने कार्य और सफलताओं से भारत में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गए और देश के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में उनका नाम गिना जाने लगा | उनकी ख्याति इतनी बढ़ गई थी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने कैबिनेट की मंजूरी के बिना ही उन्हें कुछ गुप्त परियोजनाओं पर कार्य करनेेे की अनुमति दे दी थी | भारत सरकार ने महत्वाकांक्षी इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का प्रारंभ कलाम जी के देखरेख में किया | वह इस परियोजनाा के मुख्य कार्यकारी थे | इस परियोजना ने देश को अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें दी हैं | जुलाई 1992 से लेकर दिसंबर 1999 तक कलाम जी प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सचिव थे | भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण भी इसी दौरान किया था | उन्होंने इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | आर चिदंबरम के साथ डॉ कलाम साहब इस परियोजनाा के समन्वयक थे | इस दौरान मिले मीडिया कवरेज ने उन्हें देश का सबसे बड़ा परमाणु वैज्ञानिक बना दिया था | वर्ष 1998 में कलाम जी ने हृदय चिकित्सक सोमा राजू के साथ मिलकर एक कम कीमत का Coronary Stent का विकास किया | इससे kalam-Raju stent का नाम दिया गया ! 

As President of India | भारत के राष्ट्रपति के रूप में

एक रक्षा वैज्ञानिक के तौर पर उनकी उपलब्धियों और प्रसिद्धि के मद्देनजर एन डी ए की गठबंधन सरकार ने वर्ष 2002 में उन्हें और राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया | उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी लक्ष्मी सहगल को भारी अंतर से पराजित किया  और 25 जुलाई 2002 को भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लिया | कलाम जी भारत के ऐसे तीसरे राष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत रत्न से नवाजा जा चुका था |  इससे पहले डॉ राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन को राष्ट्रपति बनने से पहले भारत रत्न से नवाजा जा चुका था |  उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा गया |अपने कार्यकाल की समाप्ति पर उन्होंने दूसरे कार्यकाल की भी इच्छा जताई  पर राजनीतिक पार्टियों में एक राय की कमी होने के कारण उन्होंने अपना यह विचार त्याग दिया |  12वें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल की समाप्ति के समय एक बार फिर उनका नाम अगले संभावित राष्ट्रपति के रूप में चर्चा में था परंतु आम सहमति नहींं होने के कारण उन्होंने अपनी उम्मीदवारी का विचार त्याग दिया !

After Retirement From The Presidency | राष्ट्रपति पद से सेवामुक्त होने के बाद

राष्ट्रपति पद से सेवा मुक्त होने के बाद कलाम जी शिक्षण, लेखन, मार्गदर्शन और शोध जैसे कार्यों में व्यस्त रहे और भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिल्लोंग, भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद,  भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर, जैसे संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर जुड़े रहे | इसके अलावा भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर के फेलो,  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस एंड साइंस टेक्नोलॉजी, तिरुवनंतपुरम के चांसलर, अन्ना यूनिवर्सिटी चेन्नई में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे | उन्होंने आईआईआईटी हैदराबाद, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, और अन्ना यूनिवर्सिटी में सूचना प्रौद्योगिकी भी पढ़ाया था | कलाम जी हमेशा  से देश के युवाओं और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के बारे में बातें किया करते थे | इसी संबंध में उन्होंने देश के युवाओं के लिए "व्हाट कैन आई गिव" पहल की शुरुआत भी की जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार का सफाया है | देश के युवाओं में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें दो बार 2003 और 2004 एमटीवी यूथ आइकन ऑफ द ईयर  अवार्ड के लिए मनोनीत भी किया गया था | वर्ष 2011 में प्रदर्शित हुई हिंदी फिल्म आई एम कलाम उनके जीवन से प्रभावित है | शिक्षण के अलावा अब्दुल कलाम जी ने पुस्तकें भी लिखी हैं जिनमें कुछ प्रमुख है- 'इंडिया 2020: आफ विजन फायर द न्यू मिलेनियम' विंग्स ऑफ़ फायर ऑटो बायोग्राफी, इगनाइटेड माइंड्स आनशीलिंग द पावर विद इन इंडिया, मिशन इंडिया, इंडोमीटेबल स्प्रिट आदि ! 

Apj Abdul Kalam Awards | एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार  

देश और समाज के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए अब्दुल कलाम जी को अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया | लगभग 40 विश्वविद्यालयों में उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी और भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण, पद्म विभूषण और भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया !

Apj Abdul kalam Death | एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु

27 जुलाई 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान शिल्लोंग में अध्यापन कार्य के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद करोड़ों लोगों के प्रिय और सब के  दिलों के चहेते डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इस दुनिया से चले गए ! 



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