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Sunday, 6 October 2019

Milkha Singh Biography in Hindi | मिल्खा सिंह का जीवन परिचय


Milkha Singh- मिल्खा सिंह देश के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों में से एक हैं | इन्होंने अपनी मेहनत और जज़्बे से पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है | मैदानी प्रतियोगिताओ के भारतीय सन्दर्भ में मिल्खा सिंह का नाम अत्यधिक प्रसिद्ध है उन्होंने अपनी सफलताओ को दूरी में नापा | अपनी अद्भुत गति के कारण वे Flying Sikh के  नाम से जाने जाते हैं ! उनका गौरवपूर्ण खेल जीवन सदैव युवा खिलाड़ियों को अधिक से अधिक शानदार प्रदर्शन के लिए प्रेरणा देता रहेगा | आज कल वे नए खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने में कार्यरत हैं.
Milkha Singh Biography in Hindi, Milkha Singh Family
Milkha Singh Biography in Hindi


Milkha Singh Biography in Hindi | मिल्खा सिंह का जीवन परिचय

मिल्खा सिंह का जन्म 8 अक्टूबर 1935 को पाकिस्तान के लायलपुर में हुआ था | इन्होंने अपने माता-पिता को भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय हुए दंगों में खो दिया था | वह भारत उस ट्रैन से आए थे जो पाकिस्तान का बॉर्डर पार करके शरणार्थियों को  भारत लाई थी | और परिवार के नाम पर उनकी सहायता के लिए उनके बड़े भाई बहन थे | मिल्खा सिंह पाकिस्तान से भारत 1947 में आए थे जब वह भारत आए तब उनकी उम्र महज़ 12 साल की थी | भारत में वह दिल्ली में अपनी शादी शुदा बहन के घर कुछ दिन तक रहें | भारत-पाक विभाजन में हुए दंगों का उनके दिलो दिमाग़ पर बहुत गहरा असर पड़ा था क्योंकि उन दंगों में उन्होंने अपने माता पिता रिश्तेदारों सभी को खो दिया था | 9वीं कक्षा पास करने के बाद वे मैकेनिकल व्यवसाय में संग्लन हो गए | बचपन में वह अपने स्कूल से घर और घर स्कूल के बीच की 10 किलोमीटर की दुरी को दौड़ कर पूरा करते थे वह स्कूल दौड़ कर ही जाते थे और वापस घर दौड़ कर ही आते थे | अपने भाई मलखान के कहने पर उन्होंने सेना में भर्ती होने का फैसला किया और काफी कोशिशों के बाद वे 1953 में वह सेना में भर्ती हो गए | आर्मी में भर्ती के वक़्त क्रॉस कंट्री रेस में वे छठे पायदान पर आए थे | इसलिए आर्मी में रहकर उन्होंने दौड़ कूद की ओर विशेष रूप से ध्यान दिया | मिल्खा सिंह का कहना है कि आर्मी में उन्हें ऐसे बहुत से लोग मिले जिन्हें यह तक मालूम नहीं था कि ओलिंपिक क्या होता है | आर्मी में रहकर वह मेहनत करने लगे और 400 मीटर की दौड़ की तैयारी शुरू कर दी |

Milkha Singh Career | मिल्खा सिंह का करियर

मिल्खा सिंह ने सेना में ही रहकर कड़ी मेहनत और संघर्ष करना शुरू कर दिया था | अपने आपको स्थापित करने के लिए उन्होंने कई प्रतियोगिताओ में सफलता हासिल की | सन 1956 में ऑस्ट्रेलिया में हुए ओलिंपिक खेलो में 200 और 400 मीटर की दौड़ में भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुभव न होने के कारण सफल नहीं हो पाए | इसके बाद उन्होंने 400 मीटर की दौड़ के विजेता से मुलाक़ात की इस मुलाक़ात ने उन्हें केवल प्रेरित नहीं किया बल्कि ट्रेनिंग के नए तरीकों से भी अवगत कराया | मिल्खा सिंह का नाम सुर्खियों में तब आया तब उन्होंने 1957 में कटक में हुए राष्ट्रीय खेलो में 200 और 400 मीटर की दौड़ में रिकॉर्ड तोड़ दिए | 400 मीटर की दौड़ 47.5 सेकंड में पूरा करके नया रिकॉर्ड बनाया था | 1958 में उन्होंने टोकियो में हुए एशियाई खेलो में 200 तथा 400 मीटर दौड़ में एशियाई रिकॉर्ड तोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीते | इसी वर्ष 1958 में कार्डिफ (ब्रिटैन) में हुए राष्ट्रमंडल खेलो में भी स्वर्ण पदक जीता | उनकी इन्हीं सफलताओं के कारण भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया | मिल्खा सिंह का नाम FLYING SIKH पड़ने का भी एक कारण था | वह जब लाहौर में भारत-पाक प्रतियोगिता में दौड़ रहें थे तब एशिया के प्रतिष्ठित धावक पाकिस्तान के अब्दुल खालिक को 200 मीटर की दौड़ में पछाड़ते हुए तेज़ी से आगे निकल गए | उस वक़्त लोगों ने कहा "मिल्खा सिंह दौड़ नहीं रहें थे बल्कि उड़ रहें थे" बस उनका नाम तब से फ्लाइंग सिख पड़ गया | मिल्खा सिंह ने अनेक बार अपनी खेल योग्यता सिद्ध की | उन्होंने 1968 में रोम ओलिंपिक में 400 मीटर दौड़ में ओलिंपिक रिकॉर्ड तोड़ दिया | उन्होंने ओलिंपिक के पिछले 59 सेकंड के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए दौड़ पूरी की | उनकी इस उपलब्धि को पंजाब में परी-कथा की भांति याद किया जाता है | और यह पंजाब की समृद्ध विरासत का हिस्सा बन चुकी है | इस वक़्त अनेक ओलिंपिक खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड तोड़ा था | उनके साथ विश्व के सर्वश्रेष्ठ एथलीट हिस्सा ले रहें थे | 1960 में रोम ओलिंपिक में मिल्खा सिंह ने 400 मीटर दौड़ की प्रथम हीट में द्वितीय स्थान (47.6 सेकंड ) पाया था | फिर सेमीफइनल में 45.90 सेकंड का समय निकलकर अमेरिकी खिलाड़ी को हराकर द्वितीय स्थान पाया था | फाइनल में वह सबसे आगे दौड़ रहें थे उन्होंने देखा कि सभी खिलाड़ी काफी पीछे हैं अतः उन्होंने अपनी गति थोड़ी धीमी करदी परन्तु दूसरे खिलाड़ी गति बढ़ाते हुए उनसे आगे निकल गए | अब उन्होंने पूरा ज़ोर लगाया परन्तु उन खिलाड़ियों से आगे नहीं निकल पाए | अमेरिकी खिलाड़ी ओटिस डेविस और कॉफमैन ने 44.8 सेकंड का समय निकालकर प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त किया | दक्षिण अफ्रीका के मैल स्पेन्स ने 45.4 सेकंड में दौड़ पूरी कर तृतीय स्थान प्राप्त किया | मिल्खा सिंह ने 45.6 सेकंड का समय  निकालकर मात्र 0.1 सेकंड से कांस्य पदक पाने का मौका खो दिया |
मिल्खा सिंह को बाद में अहसास हुआ कि गति को शुरू में कम करना घातक साबित हुआ | विश्व के महान एथलीटों के साथ प्रतिस्पर्धा में वह पदक पाने से चूक गए | मिल्खा सिंह ने खेलो में उस समय सफलता प्राप्त की जब खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी न ही उनके लिए किसी ट्रेनिंग की व्यवस्था थी | आज इतने वर्षो के बाद भी कोई एथलीट ओलिंपिक में पदक पाने में कामयाब नहीं पाया है | रोम ओलिंपिक में मिल्खा सिंह इतने लोकप्रिय हो गए थे कि जब वह स्टेडियम पहुंचते थे तो दर्शक उनका जोशपूर्वक स्वागत करते थे यघपि वह वहा के टॉप खिलाड़ी नहीं थे परन्तु सर्वश्रेष्ठ धावकों में उनका नाम अवश्य था | उनकी लोकप्रियता का दूसरा कारण उनकी बढ़ी हुई दाढ़ी और लम्बे बाल थे | लोग को उस वक़्त सिख धर्म के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी | अतः लोगों को लगता था कोई साधु संत इतनी अच्छी दौड़ लगा रहा है | उस वक़्त 'पटखा' का चलन भी नहीं था अतः सिख लोग सिर पर रूमाल बांध लेते थे | मिल्खा सिंह की लोकप्रियता का एक अन्य कारण यह भी था कि रोम पहुंचने से पहले वह यूरोप के अनेक खिलाड़ियों को हरा चुके थे | और उनके रोम पहुंचने से पहले ही उनकी लोकप्रियता की चर्चा रोम पहुँच चुकी थी |


मिल्खा सिंह के जीवन में दो घटनाए बहुत महत्व रखती हैं | पहली भारत-पाक विभाजन की घटना जिसमें उनके अपने माता-पिता क़त्ल हो गया था | तथा अन्य रिश्तेदार भी मारे गए थे | दूसरी रोम ओलिंपिक की घटना जिसमें वे पदक हासिल करने से चूक गए थे | इसी पहली घटना के कारण जब मिल्खा सिंह को पाकिस्तान में दौड़ प्रतियोगिता में मिला तो वह विशेष उत्साहित नहीं हुए | लेकिन उन्हें एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के साथ दौड़ने के लिए मनाया गया | उस वक़्त पाकिस्तान का सर्वश्रेष्ठ धावक अब्दुल खालिक था | जो अनेक एशियाई दौड़ प्रतियोगिताओ में 200 मीटर की दौड़ जीत चुका था | जब खालिक के साथ 200 मीटर की दौड़ शुरू हुई तो यूँ लगा कि मानो मिल्खा सिंह दौड़ नहीं रहे हैं बल्कि उड़ रहे हैं | उन्होंने अब्दुल ख़ालिक़ को बहुत पीछे छोड़ दिया था | लोग उनकी दौड़ को आश्चर्यचकित होकर देख रहें थे | तभी यह घोषणा हुई कि मिल्खा सिंह दौड़ने के स्थान पर उड़ रहे थे और तभी से मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख कहा जाने लगा | उस दौड़ के वक़्त पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अय्यूब भी मौजूद थे | इस दौड़ में जीत के बाद मिल्खा सिंह को राष्ट्रपति से मिलने के लिए VIP गैलरी से ले जाया गया | मिल्खा सिंह द्वारा जीती गयीं ट्राफियां, पदक उनके जूते (जिन्हें पहनकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड तोड़ा था ) ब्लेजर यूनिफार्म उन्होंने जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में राष्ट्रीय खेल संग्रहालय  को दान में दें दिए थे | 1962 में मिल्खा सिंह ने एशियाई खेलो में स्वर्ण पदक जीता | खेलो में रिटायरमेंट के बाद वह इस समय पंजाब में खेल, युवा तथा शिक्षा विभाग में अतिरिक्त खेल निदेशक के पद पर कार्यरत हैं !

Milkha Singh Family | मिल्खा सिंह का परिवार

चंडीगढ़ में मिल्खा सिंह की मुलाक़ात निर्मल कौर से हुई | जो 1955 में भारतीय महिला वॉलीबॉल की कप्तान थी और 1962 में मिल्खा सिंह ने उनसे विवाह कर लिया | मिल्खा सिंह का एक बेटा और 3 बेटियां हैं मिल्खा सिंह के बेटे का नाम चिरंजीव मिल्खा सिंह है | जिसे जीव मिल्खा सिंह भी कहा जाता है | जीव मिल्खा सिंह भारत के टॉप गोल्फ खिलाड़ियों में से एक है तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों पुरस्कार जीत चुका है | उसने 1990 में बीजिंग के एशियाई खेलो में भी भाग लिया था | मिल्खा सिंह की तीव्र इच्छा है कि कोई भारतीय एथलीट ओलिंपिक पदक जीते, जो पदक वे अपनी छोटी सी गलती के कारण जीतने से चूक गए थे | मिल्खा सिंह चाहते हैं कि वह अपने पद से रिटायर होने के बाद एक एथलेटिक अकादमी चंडीगढ़ या आसपास खोले ताकि वह देश के लिए श्रेष्ठ एथलीट तैयार कर सकें | मिल्खा सिंह अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के दम पर ही आज उस स्थान पर पहुँच सकें हैं जहाँ आज कोई भी खिलाड़ी बिना औपचारिक ट्रेनिंग के नहीं पहुँच सकता !
मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित एक फ़िल्म भी बनी है जिसका नाम Bhag Milkha Bhag हैं | इस फ़िल्म के डायरेक्ट और प्रोडूसर मेहरा हैं उन्होंने अपनी जीवनी केवल 1 रूपए में ही बेची | इस फ़िल्म में मिल्खा सिंह रोल बॉलीवुड एक्टर फरहान अख्तर ने निभाया है | मिल्खा सिंह का कहना है कि 1968 से उन्होंने कोई फ़िल्म नहीं देखी लेकिन भाग मिल्खा भाग देखने के बाद देखने के बाद उनकी आँखों में आँसू आ गए थे और उन्होंने फरहान अख्तर के अभिनय की भी काफी तारीफ की !

Milkha Singh Record and achievements |  मिल्खा सिंह रिकॉर्ड और उपलब्धियां 

1. 1957 में मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की दौड़ में 47.5 सेकंड का नया रिकॉर्ड बनाया !
2. 1958 में टोकियो जापान में हुए तीसरे एशियाई खेलो में मिल्खा ने 400 और 200 मीटर में दो नए रिकॉर्ड स्थापित किए !
3. 1959 में इंडोनेशिया में हुए चौथे एशियाई खेलो में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता !
4. 1959 में भारत सरकार ने उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया !
5. 1960 में रोम ओलिंपिक में उन्होंने 400 मीटर की दौड़ का रिकॉर्ड तोड़ा !
6. 1962 में एशियाई खेलो में मिल्खा सिंह ने स्वर्ण पदक जीता !



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