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Friday, 4 October 2019

Ratan Tata Biography in Hindi | रतन टाटा का जीवन परिचय

Ratan Tata- रतन टाटा भारत के एक महान प्रमुख उद्योगपतियों में से हैं | रतन टाटा लाखों करोड़ों लोगों के आदर्श हैं | इन्होंने अपने जीवन में कड़ी मेहनत और संघर्ष से यह मुक़ाम हासिल किया है | रतन टाटा जी का कहना है, "मैं सही फैसले लेने में विश्वास नहीं करता  बल्कि फैसले लेकर उन्हें सही साबित कर देता हूँ" रतन टाटा भारत के प्रमुख उद्योगपति और निवेशक हैं |  रतन टाटा 1991 में Tata Group के अध्यक्ष बने थे और 28 दिसंबर 2012 में रतन टाटा ने Tata Group की अध्यक्षता से इस्तीफा दें दिया था | हालांकि रतन टाटा अभी भी Tata Group के ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हुए हैं | आज टाटा ग्रुप का 65% मुनाफा विदेशो से आता है, 1990 मे उदारीकरण के बाद टाटा ग्रुप ने विशाल सफलता हासिल की है इस सफलता के श्रेय सिर्फ और सिर्फ रतन टाटा जी को जाता है | रतन टाटा ने Tata Group की सभी प्रमुख कंपनियों को जैसे टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा टी और टाटा टेलीसर्विसेस को एक नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और वे इनके  अध्यक्ष भी रहें हैं | रतन टाटा ने अपनी अगुवाई में Tata Group को नई बुलंदियों पर पहुंचाने का काम किया है | टाटा ग्रुप दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नेस ग्रुप है !
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Ratan Tata Biography in Hindi

Ratan Tata Biography in Hindi | रतन टाटा का जीवन परिचय 

रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को भारत के सूरत शहर में हुआ था | रतन टाटा Tata Group के founder Jamsetji Tata के पोते हैं | रतन टाटा का पूरा नाम रतन नवल टाटा है | रतन टाटा के पिता का नाम नवल टाटा और माता का नाम सोनू टाटा है | इनका एक भाई भी है जिसका नाम जिमी टाटा है | 1940 के दशक में जब रतन टाटा के माता-पिता दोनों एक दूसरे से अलग हुए तब रतन टाटा की उम्र 10 साल थी और इनके भाई जिमी की उम्र महज़ 7 साल थी | इसके बाद इन दोनों भाइयों का पालन पोषण इनकी दादी नवजबाई टाटा ने किया था | रतन टाटा के माता पिता के तलाक के बाद इनके पिता ने साइमन दुनोएर से दूसरी शादी करली थी |  रतन टाटा एक और सौतेला भाई भी है जिसका नाम Noel Tata है | रतन टाटा के पिता सर रतन टाटा के दत्तक लिए हुए बेटे थे | बचपन से रतन टाटा का पालन पोषण उद्योगियो के परिवार में हुआ था | वे एक पारसी पादरी परिवार से जुड़े हुए थे उनका परिवार ब्रिटिश कालीन भारत से ही एक सफल
उद्यमी परिवार था | इस वजह से रतन टाटा को अपने जीवन मे कभी भी आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं  करना पड़ा | रतन टाटा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के Campion School से पूरी की | और उसके बाद माध्यमिक शिक्षा Cathedral and john cannon school से पूरी हुई | इसके बाद इन्होंने USA की Cornell university में वास्तुकला मे  Architecture with structural engineering के साथ 1962 में स्नातक की डिग्री हासिल की | इन सबके बाद रतन टाटा ने Harvard Business School से 1975 में  Advanced Management program भी पूरा किया | रतन टाटा एक उच्च शिक्षित उद्योगपति हैं | रतन टाटा एक परोपकारी व्यक्ति है जिनके 65% से ज़्यादा शेयर चैरिटेबल संस्थाओ में निवेश किये गए हैं | रतन टाटा के जीवन का उद्देश्य भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना है और भारत देश में मानवता का विकास करना है | रतन टाटा का ऐसा मानना है कि परोपकारी को अलग नज़रिये से देखा जाना चाहिए | पहले परोपकारी अपनी संस्थाओ और अस्पतालों का विकास करते थे जबकि अब उन्हें देश का विकास करने की ज़रूरत है | सन 1961 मे वे अपने पारिवारिक व्यवसाय Tata Group मे शामिल हुए | रतन टाटा आज भी अविवाहित पुरुष हैं उनके रिश्तों को लेकर अक्सर खबरे आती गयी हैं लेकिन हम सबके सामने यह सबसे बड़ा प्रश्न है की रतन टाटा को किसने कामयाब किया उनकी कामयाबी के पीछे कौन है | मीडिया कई वर्षो से इस बात पर चर्चा करते आई है ताकि वे रतन के टाटा के सफलता के राज़ को जान सकें !

Ratan Tata Career | रतन टाटा का करियर

भारत वापस आने से पहले रतन टाटा ने लॉस एंजिल्स कैलिफ़ोर्निया मे जोन्स और एमोस मे थोड़े समय काम किया | रतन टाटा ने अपने करियर की शुरुआत टाटा ग्रुप से की थी | टाटा ग्रुप से रतन टाटा 1961 मे एक कर्मचारी के रूप मे जुड़े थे और साल 1991 आते आते वे टाटा ग्रुप के अध्यक्ष बन गए | रतन टाटा, Tata Group की कई कंपनियों मे अपना सहयोग दें चुके थे | उसके बाद 1971 मे इन्हें राष्ट्रीय रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (नेलको) में प्रभारी निदेशक का कार्य भार सौंपा गया | इसके बाद 1981 में रतन टाटा, टाटा इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष बने | 1991 में जेआरडी टाटा ने अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया और रतन टाटा को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया | रतन टाटा ने अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर टाटा ग्रुप को नई बुलंदियों पर पहुँचा दिया | रतन टाटा की अध्यक्षता में टाटा मोटर्स ने अपनी पहली कार टाटा इंडिका लॉन्च की जो काफ़ी सफल रही | इसके बाद टाटा टी ने टेटली, टाटा मोटर्स ने "जैगुआर लैंड रोवर" को टेक ओवर कर भारतीय बाज़ार में तहलका मचा दिया | दुनिया की सबसे सस्ती कार बनाने का आईडिया भी रतन टाटा का ही था | हालाँकि बाद में इन्होंने 28 दिसंबर 2012 को टाटा समूह के सभी कार्यकारी ज़िम्मेदारियों से सेवानिवृत्त हो गए थे और उनकी जगह 44 वर्षीय साइरस मिस्त्री को दी गई | टाटा समूह से अपने कार्यो से निवृत होने वाले रतन टाटा ने हाल ही में ईकॉमर्स कंपनी स्नैपडील, अर्बन लैडर और चाइनीज़ मोबइल कंपनी जिओमी में भी निवेश किया है | अभी रतन टाटा प्रधानमंत्री व्यापार, उद्योग परिषद और राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता परिषद के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त हैं !

Ratan Tata Personal Life | रतन टाटा का निजी जीवन

देश के सबसे बड़े बिज़नेस टाइकून मे से एक रतन टाटा की ज़िन्दगी मे वैसे तो किसी चीज़ की कमी नहीं है | टाटा दुनिया की जो चाहे वो चीज़ खरीद सकतें हैं | देश के इतने बड़े अमीर आदमी होने के बावजूद उनकी ज़िन्दगी कुछ अधूरी सी है दरअसल रतन अभी तक कुंवारे हैं | लेकिन उनकी ज़िन्दगी मे चार बार ऐसे मुक़ाम आये जब उनको लगा की उनको शादी कर लेनी चाहिए | लेकिन हर बार कोई न कोई ऐसी समस्या आ गई जिसकी वजह से उनकी शादी नहीं हो पाई | आज हम आपको उनकी शादी एक ऐसा किस्सा बता रहें हैं जब उनकी शादी होते होते रह गई | कुछ साल पहले रतन टाटा एक इंटरव्यू मे इस बात का खुलासा किया था कि उनका इरादा अपने पहले प्यार से शादी करने का था | लेकिन भारत चीन युद्ध की वजह से उनकी शादी नहीं हो पाई | दरअसल भारत चीन युद्ध छिड़ जाने की वजह से दो अलग देशो मे होने के चलते मिलने मे लम्बा समय हो गया जिसकी वजह से लड़की शादी कही और हो गई | दरअसल रतन टाटा जब अमेरिका मे अपनी पढ़ाई कर रहे थे तब उनकी एक अमेरिकी लड़की से दोस्ती हो गई और यहीं से शुरू हुई रतन टाटा की लव स्टोरी दोनों के बीच धीरे धीरे मोहब्बत बढ़ने लगी लेकिन रतन को मुंबई आना पड़ा क्योंकि उनकी दादी गंभीर रूप से बीमार थी | उनकी देख रेख के लिए रतन टाटा को लम्बे समय तक भारत मे ही रहना पड़ा | उस लड़की को भी उनकी दादी को देखने के लिए भारत आना था | लेकिन अचानक भारत चीन युद्ध छिड़ गया ये बात 1962 की है | जब युद्ध का असर भारत की अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा पर भी पड़ा | लम्बे समय तक भारत और अमेरिका के बीच विमान सेवा को लेकर परेशानी चलती रही | रतन टाटा ने उस लड़की से मिलने मे इतना समय लगा दिया कि उसकी शादी कही और हो गई | इस रतन टाटा का पहला प्यार भारत चीन युद्ध की भेट चढ़ गया और उनका पहला प्यार अधूरा रह गया !

Ratan Tata Achievements | रतन टाटा की उपलब्धियां 

टाटा ग्रुप में रतन टाटा ने जब अध्यक्ष पद को छोड़ा तो उनकी जगह साइरस मिस्त्री ने ले ली | रतन टाटा ने अपनी कड़ी मेहनत के बल पर टाटा ग्रुप को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया | तो चलिये जानते हैं उनके जीवन की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियां.
1. सन 1998 में टाटा ग्रुप ने रतन टाटा के नेतृत्व में पहली बार पैसेंजर कार टाटा इंडिका लॉन्च की | दो साल में ही यह कार अपने ग्रुप में नंबर वन ब्रांड के रूप में उभर कर आई !
2. टाटा ग्लोबल बेवरेज के नाम से पहचानी जानी वाली टाटा टी ने सन 2000 में टेटली समूह अधिग्रहण किया | टेटली समूह दुनिया का दूसरा  सबसे बड़ा चाय उत्पादक व वितरक समूह है | टेटली ब्रिटैन की सबसे बड़ी चाय कंपनी है !
3. टाटा ग्रुप और अमेरिकन इंटरनेशनल ग्रुप इंक (AIG)  ने संयुक्त उपक्रम के रूप में सन 2001 में TATA-AIG की शुरुआत की | इसी के साथ टाटा एक बार फिर इंश्योरेंस सेक्टर में उतरी | इससे पहले सन 1919 में दोराबजी टाटा ने New India Assurance की शुरआत की थी जो 1956 में राष्ट्रीयकृत हुई !
4. सन 2002 में टाटा ग्रुप ने विदेश संचार निगम  (बीएसएनएल) के नियंत्रणकारी शेयर हासिल कर लिये | बीएसएनएल का गठन वर्ष 1986 में हुआ था | और यह न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाला पहला भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम था !
5. सन 2003 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भारत की पहली ऐसी सॉफ्टवेयर कंपनी बनी जिसके राजस्व ने एक अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया | इसके एक साल बाद कंपनी ने सार्वजनिक शेयर जारी किए !
6. सन 2004 में टाटा मोटर्स की लिस्टिंग न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में हुई | इसी साल कंपनी ने डेवू मोटर्स की हैवी व्हीकल्स यूनिट का अधिग्रहण भी किया | वर्ष 2007 में टाटा स्टील ने एंग्लो-डच कंपनी कोरस का अधिग्रहण किया | यह यूरोप की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनी है !
7. सन 2008 में टाटा मोटर्स ने देश की सबसे सस्ती कार टाटा नैनो का अनावरण किया | रतन टाटा का सपना था कि वे देशवासियो को 1 लाख रूपये में कार उपलब्ध कराएंगे ताकि देश के सामान्य व्यक्ति भी कार चला सकें !
8. सन 2008 मे टाटा मोटर्स ने फोर्ड की जगुआर-लैंडरोवर का अधिग्रहण किया | इसके बाद जगुआर-लैंडरोवर नाम से नई कंपनी बनाई गई !
9. सन 2012 में टाटा ग्लोबल वेबरेज और स्टारबक्स ने संयुक्त  उपक्रम के तहत टाटा स्टारबक्स लिमिटेड की शुरुआत हुई | इसका पहला स्टोर मुंबई मे खुला !

Ratan Tata Awards | रतन टाटा के पुरस्कार 

1. रतन टाटा को वर्ष 2000 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया !
2. रतन टाटा को वर्ष 2008 में भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया !
3. सन 2010 में बिज़नेस लीडर एशियाई पुरस्कार !
4. सन 2016 में रतन टाटा को फ़्रांसीसी सरकार द्वारा Commander of the legion of honour पुरस्कार से सम्मानित किया गया !
इन सबके अलावा भी रतन काफ़ी सारे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है !

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Revenge of insult with success | अपमान का बदला सफलता से 

जब आप लाइफ मे कुछ बड़ा करने की सोंचते हो तो कुछ लोग आपका अपमान करते है कहते है ये तेरे बसकी बात नहीं या कहते हैं कि तेरी इतनी औकात नहीं है अगर आप अपने किसी ड्रीम पर काम करते हैं और उसमें अच्छे परिणाम नहीं मिलते हैं तो कुछ लोग कहते हैं इसको तो कुछ आता ही नहीं चले हैं बिज़नेस बनने तुम्हारे पास थोड़ा सा भी दिमाग़ है कुछ इस तरह के अल्फाज़ होते हैं लोगों के आपके खिलाफ जब आप ज़िन्दगी मे कुछ नया और दुनिया से अलग करने की सोंचते हो | इन सब बातो से हर इंसान तकलीफ होती है और आम इंसान अपने अपमान का बदला तुरंत ले लेता है खरी खोटी सुना देता है या झगड़ा भी कर लेता है लेकिन दुनिया मे कुछ ऐसे भी महान लोग होते हैं जो अपने अपमान का बदला सफलता से लेते हैं उन्हीं मे से एक हैं देश के सबसे बड़े दानवीर बिज़नेस टाइकून रतन टाटा जी जिन्होंने अपने अपमान का बदला सफलता से लिया | रतन टाटा 1991 मे टाटा ग्रुप के अध्यक्ष बने थे और 2012 मे अध्यक्ष पद रिटायरमेंट ले लिया था | अपने 21 साल के राज मे रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को शिखर तक पहुंचाया और कंपनी की वैल्यू 50 गुना तक बढ़ा दी वो फैसले लेते गए और उन्हें सही साबित करते गए इस तरह हुई बदला लेने की शुरुआत यह बात है साल 1998 की जब टाटा मोटर्स ने अपनी पहली कार पैसेंजर इंडिका बाज़ार मे उतरी थी | दरअसल यह रतन टाटा का सपना था  जिसके लिए उन्होंने जी जान से मेहनत भी की लेकिन इस कार को बाज़ार से उतना अच्छा रिस्पांस नहीं मिल पाया जितना रतन टाटा जी ने सोचा था इस वजह से टाटा मोटर्स घाटे मे जाने लगी | कंपनी से जुड़े लोगों ने घाटे को देखते हुए रतन को इसे बेचने का सुझाव दिया और न चाहते हुए भी रतन टाटा को इस फैसले को स्वीकार करना पड़ा | इसके बाद वो अपनी कंपनी बेचने के लिये अमेरिका की कंपनी फोर्ड के पास गए | रतन टाटा और फोर्ड कंपनी के मालिक की बैठक कई घंटो तक चली इस दौरान फोर्ड कंपनी के मालिक ने रतन टाटा के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया और कहा जिस व्यापार के बारे मे आपको जानकारी नहीं है उसमें इतना पैसा क्यों लगा दिया और कहा आपकी कंपनी खरीद कर हम आप पर अहसान कर रहें हैं यह अल्फाज़ फोर्ड कंपनी के मालिक के थे लेकिन यह अल्फाज़ रतन टाटा के दिलो दिमाग़ पर छप गए और रतन टाटा अपमान का घुट पीकर इस डील को कैंसिल करके चले आए | अपमान करने वाला वाक्य उन्हें बेचैन कर रहा था और उनकी रातो की नींद भी उड़ गई थी, बस इसके बाद रतन टाटा ने फैसला किया कि वह इस कंपनी को किसी को नहीं बेचेंगे और फिर लग गए कंपनी को ऊंचाइयों पर पहुंचाने | इसके बाद उन्होंने एक रीसर्च टीम तैयार की और कड़ी मेहनत और लगन से टाटा इंडिका को भारतीय बाज़ार के साथ साथ विदेशो मे भी सफलता की ऊंचाइयों पर ले गए | और फिर इस घटना के बाद से फोर्ड कंपनी का पतन शुरू हो गया साल 2008 आते आते फोर्ड कंपनी दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गई थी, मोके की नज़ाकत को देखते हुए रतन टाटा ने फोर्ड की लक्ज़री कार जगुआर लैंड रोवर को बनाने वाली कंपनी को खरीदने का प्रस्ताव रखा जिसको फोर्ड कंपनी के मालिक ने स्वीकार भी कर लिया गया | इसके बाद मीटिंग के लिए फोर्ड के अधिकारी भारत आए बॉम्बे हाउस मे मीटिंग फिक्स हुई इसके बाद यह सौदा लगभग 2.3 अरब डॉलर मे हुआ तब फोर्ड के मालिक ने वही बात दोहराई जो उन्होंने रतन टाटा से कही थी लेकिन इस बार फोर्ड के मालिक ने कहा आप हमारी कंपनी खरीद कर हम पर अहसान कर रहे हो | आज जगुआर लैंड रोवर टाटा ग्रुप का हिस्सा है और बाज़ार मे बेहतर मुनाफे के साथ आगे बढ़ रहा है ! अगर रतन टाटा चाहते तो अपने अपमान का बदला मीटिंग मे ही ले सकतें थे लेकिन कहते हैं न महान लोग अपने अपमान का बदला सफलता से लेते हैं !


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