Chanakya Quotes in Hindi | Chanakya Thoughts in Hindi - MY THINKING

Chanakya Quotes in Hindi | Chanakya Thoughts in Hindi

Chanakya Quotes in Hindi -चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे, वे कौटिल्य और विष्णुगुप्त नाम से भी प्रसिद्ध थे, चाणक्य का जन्म ईसापूर्व 283 में पाटलिपुत्र में था मृत्यु ईसापूर्व 375 पाटलिपुत्र में हुई थी, चाणक्य बहुत ही विद्वान व्यक्ति थे जो एक छोटी सी कुटिया में रहा करते थे, चाणक्य तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे, उन्होंने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया था, उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रन्थ है, अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है, तो आज हम ज़िन्दगी बदलने वाले Chanakya Quotes in Hindi और Chanakya Thoughts in Hindi में सही मार्ग दिखाने वाले चाणक्य के अनमोल विचारों को पढ़ेंगे और यदि आप इन विचारों को अपनी ज़िन्दगी में अपनाएंगे तो यक़ीनन आपके जीवन में बहुत बदलाव आएगा !

Chanakya Quotes in Hindi | Chanakya Thoughts in Hindi

Chanakya Quotes in Hindi, Chanakya Thoughts in Hindi
Chanakya Quotes in Hindi Image 

1. शिक्षा मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र है,
एक शिक्षित मनुष्य हर जगह पर सम्मान पाता है, एक शिक्षा ही है जो कि सुंदरता को भी पराजित कर सकती है !!

2. मन में सोचें हुए कार्य को किसी के सामने प्रकट ना करें,
बल्कि मनन पूर्वक उसकी सुरक्षा करते हुए उसे कार्य में परिणत कर दें !!

3. बुद्धि से पैसा तो कमाया जा सकता है,
लेकिन पैसे से बुद्धि नहीं !!

4. मुर्ख लोगों से कभी भी वाद विवाद नहीं करना चाहिए,
क्योंकि ऐसा करने से हम अपना ही समय नष्ट करते हैं !!

5. अगर सीखना ही है तो दूसरों की गलतियों से सीखो,
अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी उम्र कम पड़ जाएगी !!

6. जीवन में एक बात हमेशा याद रखो, बुद्धिमान व्यक्ति का कभी कोई दुश्मन नहीं हो सकता !!

7. यदि आप कोई काम शुरू करना चाहते हैं तो पहले तीन सवाल अपने आप से पूछो,
मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ?
इसका क्या परिणाम होगा ?
क्या मैं सफल रहूँगा ?
इन सवालों का जब संतोषजनक उत्तर मिल जाए फिर कोई निर्णय लें !!

8. अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक सामान होता है !!

9. भविष्य में आने वाली मुसीबतों के लिए धन एकत्रित करें,
ऐसा ना सोचें की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी, क्योंकि जब धन साथ छोड़ता है तो  संगठित धन भी तेज़ी से घटने लगता है !!

10. जब कोई व्यक्ति महान कहलाता है तो वह अपने कार्यो से महान बनता है, ना कि अपने जन्म से महान होता !!

11. जो व्यक्ति आलसी होता है ऐसे व्यक्ति का ना तो  वर्तमान होता है और ना ही कोई भविष्य होता है !!

12. जो आपातकाल के समय में भी आपसे प्रेम करे वही आपका सच्चा मित्र होता है !!

13. अनेक व्यक्ति जो एक ही गर्भ से पैदा हुए या एक ही नक्षत्र में पैदा हुए है एक से नहीं रहते हैं,
ठीक उसी तरह जिस तरह बेर के झाड़ के सभी बेर एक से नहीं रहते !!

14. कठिन समय के लिए धन की हमेशा रक्षा करनी चाहिए !!

15. सदा ख़ुश रहो ! क्योंकि तुम्हारा ख़ुश रहना ही तुम्हारे दुश्मनों के लिए सबसे बड़ी सज़ा है !!

16. हमेशा ज्ञानियों की सेवा करनी चाहिए,
क्योंकि ज्ञानियों की सेवा से ही ज्ञान की प्राप्ति होती है !!

17. जहाँ लक्ष्मी (धन) का निवास होता है,
वहाँ सहज ही सुख-सम्पदा आ जुड़ती है !!

18. शासक को स्वयं को योग्य बनाकर,
जो योग्य प्रशासक हैं उनकी सहायता से ही शासन करना चाहिए !!

19. भाग्य केवल उन्हीं का साथ देता है,
जो कठिन परिस्थितियों का सामना करके भी अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहते हैं !!

20. जो व्यक्ति आपकी बात को सुनते समय इधर-उधर देखे,
ऐसे व्यक्ति पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए !!

21. विद्या ही निर्धन का धन है,
और विद्या को कोई चुरा भी नहीं सकता !!

22. कोई भी व्यक्ति ऊँचे स्थान पर बैठकर ऊँचा नहीं हो जाता,
बल्कि हमेशा अपने गुणों से ऊँचा होता है !!

23. मनुष्य स्वयं ही अपने कर्मो के द्वारा जीवन में दुःख को बुलाता है !!

24. कभी भी अपनी कमज़ोरी को स्वयं उजागर ना करो !!

25. जैसे ही भय आपके क़रीब आए, उस पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर दीजिए !!

26. जो लोगों पर कठोर से कठोर सज़ा को लागू करता है वो लोगों की नज़र में घिनोना बन जाता है,
जबकि नरम सज़ा लागू करता है तो वह तुच्छ बनता है लेकिन जो योग्य सज़ा को लागू करता है  वह सम्माननीय कहलाता है !!

27. जब कोई सज़ा थोड़े मुआवज़े के साथ दी जाती है,
तब वह लोगों को नेक़ी करने के लिए निष्टावान  एवम पैसे और ख़ुशी कमाने के लिए प्रेरित करती है !!

28. हर एक दोस्ती के पीछे अपना ख़ुद का एक स्वार्थ छिपा होता है,
स्वार्थ के बिना कभी कोई दोस्ती नहीं होती, यह एक कटु सत्य है !!

29. हंस वहीं रहते हैं जहाँ पानी हो और वो जगह छोड़ देते हैं जहाँ पानी ख़त्म हो गया हो,
क्यों ना इंसान भी ऐसा ही करे प्रेमपूर्वक आए और प्रेमपूर्वक जाए !!

30. एक इंसान कभी ईमानदार नहीं हो सकता,
सीधे पेड़ हमेशा पहले काटे जाते हैं,  और ईमानदार लोग पहले से ही ढ़ीले (मरियल) होते हैं !!

31. उन लोगों से कभी दोस्ती ना करें जो आपके स्तर से बहुत ऊँचे या बहुत नीचे हो,
इस तरह की दोस्ती आपको कभी ख़ुशी नहीं दे सकती !!

32. दुनियां की सबसे बड़ी ताक़त युवाशक्ति और महिला की सुंदरता है !!

33. जब तक आपका शरीर स्वस्थ रहेगा तब तक मृत्यु आपके वश में रहेगी,
लेकिन फिर भी आप आत्मा को बचाने की कोशिश करें क्योंकि जब मृत्यु आपके पास होगी तब आप क्या करोगे !!

34. व्यक्ति अकेला ही पैदा होता है और अकेला ही मर जाता है,
वह अपने अच्छे और बुरे कर्मो का ख़ुद ही भुगतता है, और अकेले ही स्वर्ग या नरक जाता है !!

35. गरीबी, बीमारी, दुःख, कारावास और दूसरे पाप ये हमारे ख़ुद के गुनाहों का ही फ़ल है !!

36. इस धरती पर तीन रतन हैं- अनाज, पानी और मीठे शब्द,
मुर्ख लोग पत्थरों के टुकड़ो को ही रतन समझते हैं !!

37. वह जो अपने समाज को छोड़कर दूसरे समाज को अपनाता है,
वह उस राजा के सामान है जो अच्छे रास्ते को छोड़कर दुराचारी रास्ते को अपनाता है !!

38. जिस तरह गाय का बछड़ा हज़ारो गायों में भी अपनी माँ के पीछे जाता है,
उसी तरह मनुष्य के कर्म भी मनुष्य के पीछे जाते हैं !!

39. वह व्यक्ति जिसके हाथ स्वच्छ हैं कार्यलय में काम नहीं करना चाहता, जिसने अपनी कामना को ख़तम कर दिया वो शरीरिक श्रंगार नहीं करता, जो आधा पढ़ा हुआ व्यक्ति है वो मीठा नहीं बोल सकता, और जो सीधी बात करता है वो धोखा नहीं दे सकता !!

40. भगवान को मूर्तियों में ढूढ़ने की कोशिश ना करो,
आपकी अनुभूति ही आपका ईश्वर है और आपकी आत्मा ही आपका मंदिर है !!

41. जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को आग लगा दी जाए तो वह पूरे जंगल को जला देता है,
उसी तरह से एक पापी पुत्र भी पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है !!

42. वह जो भलाई को लोगों के दिलो में सभी के लिए विकसित करता चला जाता है,
वह आसानी से अपने लक्ष्य प्राप्ति के एक-एक क़दम आगे बढ़ता चला जाता है !!

43. समय को पहचानना ही मनुष्य के सीखने की सर्वोत्तम कला मानी गयी है !!

44. धर्म का पालन ही सुख का मूल है !!

45. इंसान की क़ामयाबी और नाकामयाबी उसके अपने व्यवहार पर निर्भर करती है !!

46. पहले पांच-छह साल अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखिये, अगले पांच-छह साल उन्हें डांट डपट कर रखिये,
और जब वह सोलह साल का हो जाए तो उसके साथ मित्र की तरह व्यवहार करें, आपके व्यस्क बच्चें ही आपके सबसे अच्छे मित्र होते हैं !!

47. अगर साँप ज़हरीला ना भी हो तो उसे ख़ुद को ज़हरीला दिखाना चाहिए !!

48. जो लोग परमात्मा तक पहुँचना चाहते हैं,
उन्हें वाणी, मन, इन्द्रियों की पवित्रता और एक दयालु हृदय की आवश्यकता होती है !!

49. सारस की तरह एक अकल्मन्द मनुष्य को अपनी इन्द्रियों पर काबू रखना चाहिए,
और अपने उद्देश्य को स्थान की जानकारी, समय और योग्यता के अनुसार प्राप्त करना चाहिए !!

50. एक बेहतरीन बात जो शेर से सीखी जा सकती है,
वो ये है कि व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे दिल और ज़ोरदार प्रयास के साथ करें !!

51. एक अनपढ़ व्यक्ति का जीवन उसी तरह से बेकार है जैसे की कुत्ते की पूँछ, जो ना उसका पीछे का भाग ढकती है और ना ही उसे कीड़े-मकोड़ो के डंक से बचाती है !!

52. वो जिसका ज्ञान बस किताबों तक सिमित है और जिसका धन दूसरों के क़ब्ज़े में है,
ऐसे लोग ज़रूरत पड़ने पर ना अपमान ज्ञान प्रयोग कर सकते हैं और ना ही धन !!

53. हे बुद्धिमान ! लोगों अपना धन केवल उन्हीं को दो जो उसके योग्य हों और किसी को नहीं,
बादलों के द्वारा लिया गया समुद्र का पानी हमेशा मीठा होता है !!

54. यदि किसी का स्वाभाव अच्छा है तो उसे किसी और गुण की आवश्यकता है,
यदि आदमी के पास प्रसिद्धि है तो भला उसे किसी और श्रंगार की ज़रूरत क्या है !!

55. संतुलित दिमाग़ जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है !!

56. सेवक को तब परखे जब वह काम ना कर रहा हो,
रिश्तेदारों को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में और पत्नी को घोर विपत्ति में !!

57. अपमानित होकर जीने से अच्छा मरना है,
मृत्यु तो बस एक पल का दुःख देती है लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है !!

58. वह जो हमारे चिंतन में रहता है वह क़रीब है, भले ही वह वास्तव में बहुत दूर ही क्यों ना हो,
परन्तु जो हमारे हृदय में नहीं है वो क़रीब होते हुए भी बहुत दूर होता है !!

59. वह जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ है उसे भय और चिंता का सामना करना पड़ता है,
क्योंकि सभी दुखों की जड़ लगाव है इसलिए ख़ुश रहने के लिए लगाव छोड़ देना चाहिए !!

60. साँप के फन, मक्खी के मुख और बिच्छु के डंक में ज़हर होता है,
लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो इससे पूरा भरा होता है !!

61. वेश्याएँ निर्धनों के साथ नहीं रहती,
नागरिक कमज़ोर संगठनों का समर्थन नहीं करते,
और पक्षी उस पेड़ पर घोंसला नहीं बनाते जिस पर फ़ल ना हो !!

62. हमें जो गुज़र गया उसके बारे में ज़्यादा पछतावा नहीं करना चाहिए और ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए, जो विवेकवान व्यक्ति होते हैं वह हमेशा वर्तमान में जीते हैं !!

63. फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है,
लेकिन एक व्यक्ति अच्छाई हर दिशा में फैलती है !!

64. जीवन का सबसे बड़ा गुरुमंत्र है- अपने राज़ कभी किसी को नहीं बताए, ये आपको बर्बाद कर देगा !!

65. मुर्ख लोग बुद्धिमानों से ईर्ष्या करते हैं, गलत रास्ते पर चलने वाली औरत पवित्र औरत से ईर्ष्या करती है, बदसूरत औरत खूबसूरत औरत से ईर्ष्या करती है !!

66. दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, बदमाश नौकर और सर्प के साथ निवास करना साक्षात् मृत्यु के सामान है !!

67. उस देश में निवास ना करें जहाँ आपकी कोई इज़्ज़त ना हो, जहाँ आप रोज़गार नहीं कमा सकते,
जहाँ आपका कोई मित्र नहीं और जहाँ आप कोई ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते !!

68. अच्छा मित्र वही है जो हमें निम्नलिखित परिस्थितियों में नहीं त्यागे,
दुर्घटना पड़ने पर,
जब उसकी आवश्यकता पड़ी हो,
किसी तरह का अकाल पड़ा हो,
जब युद्ध चल रहा हो,
जब हमें राजा के दरबार में जाना पड़े,
और जब हमें कब्रिस्तान जाना पड़े !!

69. दान गरीबी को ख़तम करता है, अच्छा आचरण दुःख को मिटाता है, विवेक अज्ञान को ख़तम करता है और जानकारी भय को समाप्त करती है !!

70. पुत्र वही है जो पिता का कहना मानता हो,
पिता वही है जो पुत्रों का पालन पोषण करे, मित्र वही जिस पर आप विश्वास कर सकें और पत्नी वही है जिससे आपको सुख प्राप्त हो !!

71. ऐसे लोगों से बचे जो मुँह पर तो मीठे बनते हैं लेकिन आपके पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते हैं,
ऐसे करने वाले लोग उस विष के घड़े सामान है जिसकी ऊपरी सतह  दूध से भरी होती है !!

72. एक बुरे मित्र पर तो कभी भी विश्वास ना करें,
और एक अच्छे मित्र पर भी विश्वास ना करें, क्योंकि ऐसे लोग यदि आपसे रूठ जाते हैं तो आपके सभी राज़ खोल देते हैं !!

73. मूर्खता दुखदायी है जवानी भी दुखदायी है,
लेकिन इन सबसे कही ज़्यादा दुखदायी किसी और के घर पर जाकर उसका अहसान लेना है !!

74. अकल्मन्द पिता को अपने बेटे को अच्छे गुणों की सीख देनी चाहिए,
क्योंकि नीतिज्ञ और ज्ञानी व्यक्तियों की ही कुल में पूजा होती है !!

75. जो माता पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देते हैं वो तो बच्चों के शत्रु के सामान है,
क्योंकि विद्याहीन बालक विद्वानो की सभा में ऐसे तिरस्कृत किये जाते हैं जैसे हंसो की सभा में बगुले !!

76. लाड प्यार से बच्चों में गलत आदतें ढलती हैं,
उन्हें कड़ी शिक्षा देने से वे अच्छी आदतें सीखते हैं इसलिए बच्चों को ज़रूरत पड़ने पर दण्डित करें उन्हें ज़्यादा लाड प्यार ना करें !!

77. नदी के किनारे वाले वृक्ष, दूसरे व्यक्ति के घर में जाने अथवा रहने वाली औरत और बिना मंत्रियों का राजा यह सब निश्चित रूप से ही जल्द ही नष्ट हो जाते हैं !!

78. इस दुनियां में ऐसा कौन सा घर है जिस पर कोई कलंक नहीं, वह कौन है जो रोग और दुःख से मुक्त है, सदा सुख किसको रहता है !!

79. लड़की का ब्याह अच्छे खानदान में करना चाहिए,
पुत्र को अच्छी शिक्षा मिलने वाली जगह पर ही भेजना चाहिए, शत्रु को आपत्ति और कष्टों में डालना चाहिए एवं मित्रों को धर्म कर्म में लगाना चाहिए !!

80. एक दुर्जन और सर्प में यह अंतर है,
साँप तभी डसेगा जब उसकी जान को खतरा होगा, लेकिन दुर्जन पग पग पर हानि पहुंचाने की कोशिश करेगा !!

81. राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगों को इसलिए रखते हैं,
क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ में ना बीच में और अंत में साथ छोड़कर जाते हैं !!

82. जब प्रलय आता है तो समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते हैं,
लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर आपत्ति एवं विपत्ति में भी अपनी मर्यादा नहीं भूलते हैं !!

83. मूर्खो के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए उन्हें त्याग देना ही उचित होता है,
क्योंकि वो प्रत्यक्ष रूप से दो पैरों वाले पशु के सामान हैं, जो अपने धारदार वचनों से वैसे ही हृदय को छलनी करता है, जैसे अदृश्य काँटा शरीर में घुसकर छलनी करता है !!

84. कोयल की सुंदरता उसकी गायन में है, एक स्त्री की सुंदरता उसके परिवार के प्रति समर्पण में है, एक बदसूरत आदमी की सुंदरता उसके ज्ञान में है, तथा एक तपस्वी की सुंदरता उसकी क्षमाशीलता में है !!

85. अत्याधिक सुंदरता के कारण सीताहरण हुआ, अत्यंत घमंड के कारण रावण का अंत हुआ, अत्याधिक दान देने के कारण राजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा, अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए !!

86. शक्तिशाली लोगों के लिए कोई कार्य कठिन नहीं है, व्यापारियों के लिए कोई जगह दूर नहीं है, विद्वानो के लिए कोई सा देश विदेश नहीं है, मधुभाषियों का कोई शत्रु नहीं है !!

87. जिस तरह सारा वन केवल एक ही पुष्प एवं सुगंध भरे वृक्ष से महक जाता है,
ठीक उसी तरह एक ही गुणवान पुत्र पुरे कुल का नाम बढ़ाता है !!

88. जब आप सफ़र पर जाते हो तो विद्यार्जन ही आपका मित्र है, घर पर पत्नी आपकी मित्र है, बीमार होने पर दवा आपकी मित्र है, अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र है !!

89. समुद्र में होने वाली वर्षा व्यर्थ है, जिसका पेट भरा हुआ है उसके लिए भोजन व्यर्थ है, पैसे वाले व्यक्ति के लिए भेट वस्तु का कोई अर्थ नहीं, दिन के समय जलता हुआ दिया व्यर्थ है !!

90. निर्धन लोगों को हमेशा धन की कामना रहती है, पशुओं को वाणी की कामना होती है, लोगों को स्वर्ग की कामना और देव लोगों को मुक्ति की कामना हमेशा होती है !!

91. वर्षा के जल के सामान कोई जल नहीं, ख़ुद की शक्ति के सामान कोई शक्ति नहीं, नेत्र ज्योति के सामान कोई प्रकाश नहीं, अन्न से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं !!

92. विद्या अर्जन करना यह एक कामधेनु के सामान है, जो हर मौसम में अमृत प्रदान करती है,
 वह विदेश में माता के सामान रक्षक एवं हितकारी होती है, इसलिए विद्या को एक गुप्त धन कहा जाता है !!

93. एक ऐसा बालक जो जन्म के वक़्त मृत था, एक मुर्ख दीर्घायु बालक से बेहतर है,
पहला बालक तो केवल एक क्षण के लिए ही दुःख देता है, जबकि दूसरा बालक जीवनभर अपने माता पिता को दुःख की अग्नि में जलाता है !!

94. वह गाय किस काम की जो जो ना दूध देती हो और ना ही बच्चे को जन्म देती है,
उसी प्रकार उस बच्चे का जन्म किस काम जो ना विद्वान हुआ हो और ना ही भगवान का भक्त !!

95. व्यक्ति जब जीवन के दुखों में झुलसता है तो उसे निम्नलिखित ही सहारा देते है :-
ख़ुद के बच्चें, पत्नी और भगवान के भक्त !!

96. जिस व्यक्ति के पुत्र नहीं उसका घर उजाड़ है, जिसका कोई सम्बन्धी नहीं उसकी सभी दिशाएँ उजाड़ हैं, मुर्ख व्यक्ति का हृदय उजाड़ है, निर्धन व्यक्ति का सब कुछ उजाड़ है !!

97. जिस अध्यात्मिक सीख का आचरण नहीं किया जाता वो ज़हर है, जिसका पेट खराब है उसके लिए भोजन ज़हर है, निर्धन व्यक्ति के लिए लोगों का किसी सामाजिक या व्यक्तिगत कार्यक्रम में एकत्र होना ज़हर है !!

98. जिस व्यक्ति के पास धर्म और दया नहीं उसे दूर करो, जिस गुरु के पास अध्यात्मिक ज्ञान नहीं उसे दूर करो, जिस पत्नी के चेहरे पर हर वक़्त घृणा हो उसे दूर करो, जिन रिश्तेदारों के पास प्रेम नहीं उन्हें दूर करो !!

99. सोने की परख उसे घिस कर,  काट कर, गरम करके और पीट कर की जाती है,
उसी तरह व्यक्ति का परीक्षण भी वह कितना त्याग करता है, उसका आचरण किस तरह का है, उसमें कौन कौन से गुण हैं और उसका व्यवहार कैसा है यह सब देख कर किया जाता है !!

100. सत्य की शक्ति ही इस दुनियां को धारण करती है, सत्य की शक्ति से ही सूर्य प्रकाशमान है, हवाए चलती है, सही में सब कुछ सत्य पर आधारित है !!

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Note:- Chanakya Quotes in Hindi की पोस्ट कैसी लगी आपको प्लीज आप कमेंट करके ज़रूर बताए अगर आपको हमारे द्वारा शेयर किये गए आर्टिकल में कोई भी कमी नज़र आती है तो कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताए हम उसमे सुधार करके अपडेट करते रहेंगे | हमारी पोस्ट आपको अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों और अपने सोशल मीडिया अकाउंट Facebook, Whatsapp, Instagram और  Twitter पर ज़रूर शेयर करे !

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